करतला / कथरीमाल – महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना (मनरेगा) में भ्रष्टाचार का बड़ा मामला करतला जनपद के ग्राम पंचायत कथरीमाल से सामने आया है। यहां हितग्राही गौतम प्रसाद ने 3 साल पहले पक्का फर्श कोटना का निर्माण पूरा करा दिया, लेकिन आज तक उसे सामग्री की 64 हजार रुपये की राशि नहीं मिली।
हितग्राही ने जून 2025 में कलेक्टर कोरबा को लिखित शिकायत देकर बकाया राशि दिलाने और दोषी रोजगार सहायक पर कार्रवाई की मांग की थी, लेकिन 3 माह बाद भी शिकायत पर कोई कार्रवाई नहीं हुई है।
क्या है पूरा मामला
गौतम प्रसाद को वर्ष 2022 में मनरेगा के तहत पक्का फर्श कोटना निर्माण के लिए 77 हजार रुपये स्वीकृत हुए थे। इसमें 13 हजार मजदूरी और 64 हजार सामग्री मद था।
हितग्राही के अनुसार उसने 2 जुलाई 2022 से 11 अगस्त 2023 के बीच निर्माण पूरा कर दिया। ग्राम पंचायत के रोजगार सहायक धनऊ राम दिवाकर ने ही काम की देखरेख की। काम के बाद 13 हजार मजदूरी का भुगतान ऑनलाइन हो गया, पर 64 हजार की सामग्री राशि आज तक लंबित है।
रोजगार सहायक बोला – जांच करेंगे, रिकॉर्ड में पैसा निकल चुका
जब इस संबंध में रोजगार सहायक धनऊ राम दिवाकर से बात की गई तो उन्होंने कहा कि जांच करेंगे कि कितना काम हुआ है। जबकि मनरेगा के ऑनलाइन रिकॉर्ड में इसी काम के लिए 61,500 रुपये का भुगतान दिख रहा है।
गौतम का आरोप है कि रोजगार सहायक ने उससे खर्च पूछा और नगद लाकर देने का भरोसा दिया था। अब राशि निकल चुकी है पर उसके हाथ नहीं आई।
जय आरती ट्रेडर्स है असली खिलाड़ी
मीडिया की पड़ताल में खुलासा हुआ कि गौतम के मटेरियल का 61,500 रुपये का भुगतान वाउचर नंबर 444 में जय आरती ट्रेडर्स को बिल दिनांक 18 जून 2025 के जरिए किया गया है।

हैरानी की बात है कि हितग्राही इस फर्म को जानता तक नहीं है। उसने सामग्री गांव के पास पंतोरा से शीट-पाइप, गांव से रेती और अन्य जगह से गिट्टी नगद में खरीदी थी।
EWS आवास में चल रही दुकान
जांच में पता चला कि जय आरती ट्रेडर्स मनरेगा में मटेरियल सप्लायर वेंडर के रूप में दर्ज है। इसका पता एमपी नगर कोरबा EWS-246/247 और संचालक आशीष कुमार जोगी बताया गया है। मौके पर ऐसी कोई दुकान नहीं मिली।
सूत्रों के अनुसार मनरेगा शाखा में बैठे कुछ कर्मचारियों की मिलीभगत से इसी फर्म के जरिए कई हितग्राहियों की राशि का बंदरबांट किया जा रहा है।
ग्रामीणों ने कलेक्टर से उच्च स्तरीय जांच कर दोषियों पर कड़ी कार्रवाई और हितग्राही को उसकी बकाया राशि दिलाने की मांग की है।








