ट्री मैन ऑफ़ इंडिया विष्णु लांबा इन दिनों छत्तीसगढ़ दौरे पर हैं. उनका एक खास अभियान इन दिनों चर्चा में है. छत्तीसगढ़ और आसपास के राज्य में बड़े पैमाने पर नक्सलियों ने सरेंडर किया है. केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की घोषणा के अनुसार 31 मई 2026 तक नक्सलवाद को समाप्त करने की दिशा में लगातार प्रयास जारी है. विष्णु लांबा इन सरेंडर नक्सलियों के लिए नक्सल ग्रीन मिशन चला रहे हैं. ट्री मैन ऑफ इंडिया के नाम से जाने जाने वाले विष्णु लाम्बा कोरबा पहुचे और इस मिशन के सम्बन्ध जानकारी दी है
इस मिशन के तहत नक्सलियों को वह पर्यावरण संरक्षण से जोड़ने की मुहिम पर वो काम कर रहे हैं. जल, जंगल और जमीन की जो लड़ाई नक्सली बंदूक की नोक पर लड़ रहे थे. अब सरेंडर करने के बाद वह वनमित्र, वनसखी बनकर यह अभियान को आगे बढ़ाएंगे. ऐसा विष्णु लांबा का मानना है कि इस मिशन के लिए वो छत्तीसगढ़ सरकार और सरेंडर नक्सलियों से भी संपर्क में हैं. उनका मानना है कि वनमित्र बनकर सरेंडर नक्सली जंगल का संरक्षण कर सकते हैं, जिससे उनको एक नई पहचान भी मिलेगी. विष्णु लांबा अपने कल्पतरु संस्थान के माध्यम से न सिर्फ देश बल्कि विदेशों में भी पर्यावरण संरक्षण के लिए काम करते आ रहे हैं. उनके नाम पर एक करोड़ से अधिक पेड़ लगाने का रिकॉर्ड दर्ज है. राष्ट्रपति पुरस्कार से भी उन्हें नवाजा जा चुका है. अपने कोरबा प्रवास के दौरान ट्री मैन ऑफ इंडिया के नाम से जाने जाने वाले विष्णु लांबा ने पत्रकारों से खास बातचीत की.और अपने मिशन के सम्बन्ध मे पत्रकारों से चर्चा की ।
ट्री मैन ऑफ इंडिया के नाम से जाने जाने वाले विष्णु लांबा ने आगे बताया की प्रकृति से जो लिया है उसे वापस लौटाना पड़ेगा. इससे हम पीछे नहीं हट सकते. सभी लोग को प्रकृति को देना पड़ेगा. प्रकृति किसी को नहीं बख्शती. प्रकृति से खिलवाड़ ठीक नहीं है. इसी कोरबा जिले में अपने कोरोना देखा है. देखो आप मेरे पीछे यहां, जहां हम खड़े हैं, एक बादाम का पेड़ है और एक काजू का. कोरबा में ही आज संभव है. राजस्थान की धरती पर संभव नहीं है.चाहे कोई भी चीज हो, प्रकृतिक संपदा की रक्षा पूरी साहस से करेंगे तो किसी की क्या मजाल है वो खतरे में पड़े.








