कोरबा। प्रधानमंत्री आवास योजना (ग्रामीण) में भ्रष्टाचार का एक और सनसनीखेज मामला कोरबा जिले के करतला विकासखंड से सामने आया है। ग्राम पंचायत बरकोन्हा में हितग्राही मंजू बाई राठिया के नाम स्वीकृत आवास का निर्माण मौके पर आधा-अधूरा पड़ा है, लेकिन सरकारी पोर्टल पर इसे 6 अप्रैल 2026 को ही पूर्ण दर्शाकर पूरी राशि का भुगतान कर दिया गया।
आरोप है कि हितग्राही के असली मकान की जगह किसी दूसरे पक्के मकान की तस्वीरों को जियो टैग कर पोर्टल पर अपलोड किया गया है।
किश्तों में ऐसे हुआ भुगतान –
वित्तीय वर्ष 2024-25 में स्वीकृत इस आवास के लिए –
– पहली किश्त: 40,000 रुपये (04 दिसंबर 2025)
– दूसरी किश्त: 55,000 रुपये (23 जनवरी 2026)
– तीसरी किश्त: 25,000 रुपये (23 जून 2026)
यानी कुल 1 लाख 20 हजार रुपये हितग्राही के खाते में जारी हो चुके हैं, जबकि मौके पर मकान आज भी अधूरा है।
निगरानी तंत्र पर सवाल –
इस पूरे खेल ने जियो टैगिंग की प्रक्रिया पर ही सवाल खड़ा कर दिया है। ग्रामीणों का आरोप है कि आवास मित्र, रोजगार सहायक, पंचायत सचिव और जनपद के तकनीकी अमले की मिलीभगत के बिना फर्जी जियो टैगिंग संभव ही नहीं है।
ग्रामीणों ने मांग की है कि करतला ब्लॉक में पूर्ण दिखाए गए सभी आवासों की मौके पर और जियो टैग की तकनीकी जांच कराई जाए। पूर्व में भी ऐसे मामले सामने आने के बाद कार्रवाई नहीं होने से कर्मचारियों के हौसले बुलंद हैं।
अब सबसे बड़ा सवाल – जब मकान अधूरा है तो उसे पूर्ण किसने किया? और फर्जी फोटो को सत्यापित किसने किया? फिलहाल प्रशासन की जांच पर सबकी नजर टिकी है। जांच में गड़बड़ी मिली तो संबंधितों पर कार्रवाई और राशि वसूली तय है।








