जनपद का नोटिस जारी, 13 दिन बाद भी जवाब का इंतजार
कोरबा/करतला। ग्राम पंचायत सरगबुंदिया में लाखों रुपये की लागत से स्वीकृत दुकान निर्माण कार्य अधूरा रहने का मामला अब गंभीर सवाल खड़े कर रहा है। जनपद पंचायत करतला ने इस मामले में पूर्व सरपंच आराधना तंवर और पंचायत सचिव प्रमोद कुमार राठिया को 3 जून 2026 को कारण बताओ सूचना पत्र जारी किया था, लेकिन 16 जून की दोपहर तक विभाग को संतोषजनक जवाब मिलने की पुष्टि नहीं हो सकी है।
पत्र में उल्लेख अनुसार वित्तीय वर्ष 2021-22 में राष्ट्रीय राजमार्ग क्रमांक 149-बी चांपा-उरगा सड़क चौड़ीकरण परियोजना से प्रभावित ग्राम पंचायत सरगबुंदिया में दुकान निर्माण कार्य के लिए लगभग 6.82 लाख रुपये की प्रशासकीय स्वीकृति प्रदान की गई थी। दस्तावेजों के अनुसार निर्माण कार्य के लिए 3 लाख 41 हजार 99 रुपये का भुगतान भी किया जा चुका है। इसके बावजूद दुकान निर्माण कार्य पूर्ण नहीं होने पर जनपद पंचायत ने मामले को गंभीरता से लेते हुए नोटिस जारी किया।
तीन दिन का समय, लेकिन 13 दिन तक भी जवाब का इंतजार
नोटिस में स्पष्ट रूप से तीन दिवस के भीतर निर्माण कार्य पूरा कर पूर्णता प्रमाण पत्र प्रस्तुत करने के निर्देश दिए गए थे। अब सवाल यह उठ रहा है कि जब समय सीमा तीन दिन तय की गई थी, तो आखिर 13 दिन में भी स्थिति स्पष्ट क्यों नहीं हो सकी? क्या निर्माण कार्य आज भी अधूरा है? यदि हां, तो भुगतान के बाद भी काम पूरा क्यों नहीं कराया गया?
सरकारी धन के उपयोग पर उठे सवाल
जनपद पंचायत के नोटिस में अधूरे निर्माण कार्य को शासकीय राशि के उपयोग से जुड़ा गंभीर विषय माना गया है। ऐसे में यह मामला केवल निर्माण कार्य की देरी तक सीमित नहीं रह जाता, बल्कि स्वीकृत राशि और कार्य की प्रगति के बीच अंतर को लेकर भी सवाल खड़े करता है।
वर्तमान सरपंच से संपर्क की कोशिश, फोन नहीं उठा
इस संबंध में पूर्व सरपंच आराधना तंवर के पति एवं वर्तमान सरपंच अश्वनी तंवर से दूरभाष के माध्यम से पक्ष जानने का प्रयास किया गया, लेकिन उन्होंने फोन रिसीव नहीं किया।
वहीं जनपद पंचायत करतला के मुख्य कार्यपालन अधिकारी वैभव कौशिक से संपर्क करने पर उन्होंने बताया कि वे वर्तमान में टीएल बैठक में हैं। इसलिए मामले में विस्तृत जानकारी नहीं मिल सकी।
अब क्या होगी कार्रवाई?
नोटिस में स्पष्ट चेतावनी दी गई है कि निर्धारित समय सीमा में कार्य पूर्ण नहीं होने अथवा संतोषजनक जवाब प्रस्तुत नहीं किए जाने की स्थिति में पंचायत राज अधिनियम की धारा 92 के तहत कार्रवाई की जा सकती है। अब देखना होगा कि विभाग इस मामले में आगे क्या कदम उठाता है और अधूरे निर्माण कार्य के लिए जिम्मेदारी किसकी तय होती है।
बड़ा सवाल
सरकारी राशि खर्च होने के बाद भी निर्माण अधूरा क्यों है?
नोटिस मिलने के बाद जवाब देने में देरी क्यों हुई?
और क्या अब सरपंच-सचिव पर विभागीय कार्रवाई की गाज गिरेगी?
इन सवालों के जवाब आने वाले दिनों में सामने आ सकते हैं, लेकिन फिलहाल सरगबुंदिया का यह मामला क्षेत्र में एक बार फिर चर्चा का विषय बना हुआ है।

