कोरबा जिले में “सुशासन तिहार” के नाम पर ग्रामीणों को एक बार फिर सिर्फ पावती थमा दी गई। चौंकाने वाली बात यह है कि ये वही ग्रामीण हैं जिनके पिछले साल सुशासन तिहार में दिए गए आवेदनों का एक साल बाद भी निराकरण नहीं हो पाया है।
मामला मुख्यमंत्री के लेमरू प्रवास से जुड़ा है। लेमरू क्षेत्र के 20 से अधिक ग्रामीण अपनी पुरानी शिकायतें लेकर सुशासन तिहार में पहुंचे। ग्रामीणों का आरोप है कि पिछले साल सुशासन तिहार में उन्होंने 10 आवेदन दिए थे, लेकिन 1 साल बीत जाने के बाद भी एक भी आवेदन पर कोई कार्रवाई नहीं हुई।
इस बार भी अधिकारियों ने आवेदन लेकर ग्रामीणों को सिर्फ पावती दी और जल्द निराकरण का आश्वासन दिया। इससे नाराज ग्रामीणों ने कहा कि जब पिछले आवेदनों पर ही सुनवाई नहीं हुई तो नई पावती का क्या मतलब। ग्रामीणों ने प्रशासन पर सिर्फ औपचारिकता निभाने का आरोप लगाया है।
*क्या कहते हैं ग्रामीण*
– “पिछले साल 10 आवेदन दिए थे। एक साल हो गया, न कोई अधिकारी आया न कोई जवाब मिला।”
– “हर बार पावती दे देते हैं, लेकिन काम शून्य। सुशासन तिहार सिर्फ कागजों में दिखता है।”
फिलहाल ग्रामीणों ने जिला प्रशासन से पुराने आवेदनों के शीघ्र निराकरण की मांग की है। अब देखना होगा कि इस बार सुशासन तिहार में मिले आवेदनों पर कार्रवाई होती है या फिर से ग्रामीणों को अगली पावती का इंतजार करना पड़ेगा।

