कोरबा जिले की स्वास्थ्य व्यवस्था एक बार फिर सवालों के घेरे में है। इस बार मामला करतला सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र का है, जहां एक मरीज और उसके परिजनों ने अस्पताल प्रबंधन पर गंभीर लापरवाही के आरोप लगाए हैं।
मरीज का दावा है कि अस्पताल में बुखार जांचने के लिए मौजूद डिजिटल थर्मामीटर की बैटरी ही खत्म थी और तापमान मापे बिना ही डॉक्टर इलाज शुरू करने की तैयारी कर रहे थे।
19 जून की दोपहर हुई इस घटना का वीडियो भी सामने आया है, जिसके बाद स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता को लेकर नई बहस छिड़ गई है।
करतला सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र…
जहां इलाज कराने पहुंचे कृष्णा नगर निवासी चंद्र प्रकाश ओझा ने अस्पताल की व्यवस्थाओं पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं।
चंद्र प्रकाश ओझा के अनुसार वे बुखार और अन्य स्वास्थ्य समस्याओं से परेशान होकर अस्पताल पहुंचे थे। उसी दौरान अस्पताल परिसर में फायर सेफ्टी का डेमो कार्यक्रम चल रहा था।
परिजनों का आरोप है कि उन्हें पहले करीब दस मिनट इंतजार करने को कहा गया, लेकिन डॉक्टर के पहुंचने में लगभग आधा घंटा लग गया।
आरोप यहीं खत्म नहीं होते…
परिजनों का कहना है कि जब डॉक्टर मरीज को देखने पहुंचे तो तापमान मापने के लिए थर्मामीटर का इस्तेमाल नहीं किया गया।
बताया जा रहा है कि अस्पताल में उपलब्ध डिजिटल थर्मामीटर की बैटरी डाउन थी।
मरीज पक्ष का आरोप है कि डॉक्टर ने केवल हाथ लगाकर मरीज की स्थिति का अंदाजा लगाया और इसके बाद इंजेक्शन लगाने तथा सलाइन चढ़ाने की तैयारी शुरू कर दी।
यहीं से अस्पताल में बहस शुरू हो गई।
चंद्र प्रकाश ओझा और उनके परिजनों ने उपचार प्रक्रिया पर सवाल उठाए।
उनका कहना था कि जब मरीज को बुखार है तो सबसे पहले तापमान की सही जांच होना जरूरी है।
परिजनों ने आरोप लगाया कि बिना आवश्यक जांच के इलाज शुरू किया जा रहा था, जिसका उन्होंने विरोध किया।
इसी दौरान उन्होंने पूरी घटना का वीडियो भी रिकॉर्ड किया, जो अब चर्चा का विषय बना हुआ है।
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परिजनों का कहना है कि सरकारी अस्पताल से संतोषजनक उपचार नहीं मिलने के कारण उन्हें निजी अस्पताल का रुख करना पड़ा।
जहां इलाज कराने में अतिरिक्त खर्च भी उठाना पड़ा।
मामला सामने आने के बाद स्थानीय लोगों में भी चर्चा शुरू हो गई है।
लोग सवाल उठा रहे हैं कि यदि सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में बुनियादी उपकरण ही कार्यशील नहीं हैं तो मरीजों को बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं कैसे मिलेंगी।
सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या वास्तव में अस्पताल में केवल एक ही थर्मामीटर था?
यदि था, तो उसकी बैटरी खत्म होने के बाद वैकल्पिक व्यवस्था क्यों नहीं की गई?
क्या मरीजों की जांच तय मानकों के अनुसार हो रही है?
और क्या स्वास्थ्य विभाग इस मामले की जांच करेगा?
इन तमाम सवालों के जवाब का इंतजार अब पूरे क्षेत्र को है।
फिलहाल इस पूरे मामले में स्वास्थ्य विभाग और अस्पताल प्रबंधन की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।
लेकिन 19 जून की दोपहर हुई इस घटना ने एक बार फिर सरकारी स्वास्थ्य व्यवस्थाओं की जमीनी हकीकत पर बहस छेड़ दी है।


