कोरबा, 26 सितंबर। जमीन खरीदने के बाद सबसे बड़ी टेंशन नामांतरण की होती है। पहले लोगों को महीनों तक पटवारी और तहसील के चक्कर काटने पड़ते थे। लेकिन अब सरकार की नई योजना से यह झंझट खत्म हो गया है।
कोरबा के गीता वैली में रहने वाले मोहित बत्रा ने हाल ही में एक प्लॉट खरीदा। उन्हें लगा था कि अब नामांतरण के लिए दौड़-भाग करनी पड़ेगी। लेकिन ऐसा कुछ नहीं हुआ। छत्तीसगढ़ सरकार की सेवा संकल्प स्वतः नामांतरण योजना के तहत उनकी रजिस्ट्री होते ही नामांतरण की प्रक्रिया अपने आप शुरू हो गई।
मोहित बत्रा ने बताया कि उन्हें घर बैठे ही डिजिटल बी-वन और अन्य कागजात मिल गए। किसी भी दफ्तर में जाने की जरूरत नहीं पड़ी।
पहले नामांतरण में महीनों लग जाते थे और कागजी कार्रवाई में समय बर्बाद होता था। अब डिजिटल सिस्टम से काम आसान और पारदर्शी हो गया है। रजिस्ट्री के तुरंत बाद नामांतरण होने से लोगों को राहत मिल रही है और समय की बचत भी हो रही है।
यह योजना उन लोगों के लिए काफी मददगार साबित हो रही है जो जमीन या मकान खरीदने के बाद नामांतरण को लेकर परेशान रहते थे।








