*कोरबा, 11 मई* – जिला पंचायत कार्यालय में सोमवार को उस समय हड़कंप मच गया जब जिला पंचायत अध्यक्ष पवन सिंह सहित सभी सदस्यों ने CEO दिनेश नाग के खिलाफ खुला मोर्चा खोल दिया। आक्रोशित जनप्रतिनिधियों ने कार्यालय के मुख्य गेट पर धरना देकर जमकर नारेबाजी की और CEO पर गंभीर आरोप लगाए।
*क्या हैं आरोप?*
धरने के दौरान जिला पंचायत अध्यक्ष पवन सिंह ने CEO दिनेश नाग पर 5 प्रतिशत कमीशन मांगने, महिला जनप्रतिनिधियों से अभद्र भाषा में बात करने और मनमानी कार्यशैली अपनाने का आरोप लगाया। सदस्यों का कहना है कि विकास कार्यों पर चर्चा के बावजूद उनकी बातों और सुझावों को लगातार नजरअंदाज किया जा रहा है।
पवन सिंह ने कहा, “CEO की कार्यप्रणाली से सभी जनप्रतिनिधि परेशान हैं। चुने हुए प्रतिनिधियों की लगातार अनदेखी हो रही है और अफसरशाही हावी है। महिला सदस्यों से भी अभद्र व्यवहार किया जाता है।”
*एक महीने का अल्टीमेटम*
अध्यक्ष ने चेतावनी दी कि यदि एक माह के भीतर CEO के खिलाफ कार्रवाई नहीं हुई तो सभी सदस्य सदन की कार्यवाही का बहिष्कार करेंगे। जरूरत पड़ने पर सदन में ताला लगाने की कार्रवाई भी की जाएगी।
*DMF बैठक का भी बहिष्कार*
पवन सिंह ने नाराजगी जताते हुए कहा कि वे जिला खनिज न्यास निधि (DMF) शाखा के सदस्य हैं, लेकिन CEO की कार्यप्रणाली से क्षुब्ध होकर आज होने वाली DMF की बैठक का बहिष्कार कर रहे हैं। उन्होंने कहा, “जब जनप्रतिनिधियों का सम्मान ही सुरक्षित नहीं है तो ऐसी बैठकों में शामिल होने का कोई औचित्य नहीं रह जाता।”
*पहले से था असंतोष*
बताया जा रहा है कि CEO दिनेश नाग के खिलाफ असंतोष लंबे समय से पनप रहा था। पूर्व में भी जनप्रतिनिधि आंदोलन की तैयारी कर चुके थे, लेकिन वरिष्ठ नेताओं के हस्तक्षेप के बाद मामला शांत करा दिया गया था। सदस्यों का आरोप है कि इसके बावजूद CEO की कार्यशैली में कोई बदलाव नहीं आया।
धरने में शामिल सदस्यों ने कहा, “हमने कई CEO देखे हैं, लेकिन ऐसा व्यवहार पहली बार देखने को मिल रहा है। पूरी तरह अफसरशाही के रवैये से काम हो रहा है।”
फिलहाल जनप्रतिनिधियों ने आर-पार की लड़ाई का संकेत देते हुए प्रशासन और शासन से तत्काल हस्तक्षेप की मांग की है।

