कलेक्टर से सीएम हेल्पलाइन तक शिकायत, फिर भी नहीं हुए कार्यमुक्त
खुद ही पाली सीईओ और खुद ही निराकरणकर्ता, शिकायत भेज दी गई ‘स्पेशल क्लोजर’ में
शिकायतकर्ता अब न्यायालय जाने की तैयारी में लगा
कोरबा। जनपद पंचायत पाली में सहायक परियोजना अधिकारी मोहनीश आनंद देवांगन के तबादले को लेकर शासन के आदेश के पालन पर सवाल उठ रहे हैं। राज्य शासन के पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग ने पहले इनका तबादला कोरबा से सूरजपुर जिला के लिए किया लेकिन आदेश को संशोधन करा लिया गया। इसके बाद 20 फरवरी 2026 को आदेश जारी कर मोहनीश आनंद देवांगन का स्थानांतरण सूरजपुर जिले से सक्ती जिला किया गया। इस आदेश जारी हुए अब करीब सात माह होने को आए हैं, लेकिन शिकायत के अनुसार वे अब भी जनपद पंचायत पाली में प्रभारी मुख्य कार्यपालन अधिकारी के रूप में पदस्थ हैं और उन्हें कार्यमुक्त नहीं किया गया है।
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ग्राम पंचायत बरपाली के लखन गोस्वामी ने इस मामले में 17 जून 2026 को कलेक्टर को लिखित शिकायत देकर शासन के स्थानांतरण आदेश का पालन कराने तथा सहायक परियोजना अधिकारी मोहनीश आनंद देवांगन को कोरबा जिले से भारमुक्त करने की मांग की थी। शिकायत में कहा गया था कि शासन के आदेश के बावजूद संबंधित अधिकारी को कार्यमुक्त नहीं किया गया है। शिकायतकर्ता ने यह भी सवाल उठाया था कि आखिर किस कारण से शासन के आदेश का पालन नहीं हो रहा है।
कलेक्टर से शिकायत के बाद भी कार्रवाई नहीं होने पर शिकायतकर्ता ने 20 जुलाई 2026 को मुख्यमंत्री जनशिकायत पोर्टल यानी सीएम हेल्पलाइन 1076 में भी शिकायत दर्ज कराई। शिकायत क्रमांक WP260700107204 में शासन के स्थानांतरण आदेश का पालन नहीं किए जाने, अधिकारी को कार्यमुक्त नहीं किए जाने तथा पूर्व में की गई शिकायत पर कार्रवाई नहीं होने की बात कही गई। शिकायत में स्थानांतरण आदेश का पालन कराने, उच्च स्तरीय जांच कराने तथा जिम्मेदार अधिकारियों पर नियमानुसार कार्रवाई की मांग की गई।
सीएम हेल्पलाइन की शिकायत पर अब 15 सितंबर 2026 को स्वयं जनपद पंचायत पाली की ओर से, जो कि खुद मोहनीश देवांगन ही हैं ने जवाब जारी किया है। इसमें कहा गया है कि लखन गोस्वामी द्वारा की गई शिकायत विभागीय स्थापना संबंधी होने के कारण सीएम हेल्पलाइन की शिकायत प्रणाली के अंतर्गत मान्य नहीं है। पत्र में उक्त शिकायत को ‘स्पेशल क्लोजर’ हेतु भेजे जाने की बात कही गई है। दूसरी तरफ हेल्पलाइन में यह शिकायत उचित प्राधिकारी को प्रेषित किए जाने की भी बात कही गई है। किन्तु इसके पहले ही अपने मामले में मोहनीश ने खुद ही फैसला लिख दिया है।
यहां सवाल यह है कि जब शिकायत शासन के स्थानांतरण आदेश के पालन को लेकर है, तो करीब सात माह बाद भी आदेश पर अमल क्यों नहीं हुआ? यदि शासन के 20 फरवरी 2026 के स्थानांतरण आदेश में बाद में कोई संशोधन, स्थगन या निरस्तीकरण किया गया है तो उसका स्पष्ट आदेश सामने क्यों नहीं है? और यदि ऐसा कोई आदेश नहीं हुआ है तो मोहनीश आनंद देवांगन को अब तक कार्यमुक्त क्यों नहीं किया गया?
एक ओर शासन स्थानांतरण आदेश जारी करता है, दूसरी ओर उसका पालन नहीं होता। फिर इसी मामले को लेकर कलेक्टर से शिकायत होती है और मामला सीएम हेल्पलाइन तक पहुंचता है। इसके बाद भी शिकायतकर्ता को आदेश के पालन की स्थिति बताने के बजाय शिकायत को ‘स्पेशल क्लोजर’ के लिए भेज दिया जाता है।
ऐसे में मामला अब सिर्फ एक अधिकारी के तबादले तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि शासन के आदेशों के पालन को लेकर भी सवाल खड़े कर रहा है। सवाल यही है कि मोहनीश पर किसकी विशेष कृपा है? आखिर सरकार का तबादला आदेश सात माह बाद भी प्रभावी नहीं हो पाया तो फिर ऐसे आदेश का मतलब क्या है?








