कोरबा।करतला ब्लॉक की ग्राम पंचायत जर्वे में प्रधानमंत्री आवास योजना और मनरेगा मास्टर रोल में बड़े पैमाने पर फर्जीवाड़े का मामला सामने आया है। ग्रामीणों ने सरपंच, सचिव, रोजगार सहायक और आवास मित्र पर मिलीभगत कर भ्रष्टाचार के गंभीर आरोप लगाए हैं।
ग्रामीणों का आरोप है कि 90 दिवस का काम पूरा दिखाकर आवासों को जल्दबाजी में “पूर्ण” दर्शा दिया गया। इसके एवज में पूर्व आवास मित्र और जिम्मेदारों ने राशि में से कमीशन ले लिया। पंचायत में पहले से ही फर्जी जिओटैग और अपात्रों को आवास देने के आरोप लगते रहे हैं।

सबसे बड़ा खुलासा मनरेगा भुगतान में हुआ है। हितग्राहियों के नाम से मजदूरी का भुगतान अन्य व्यक्तियों के खातों में कर दिया गया है। कई हितग्राहियों का कहना है कि उन्होंने काम ही नहीं किया, फिर भी उनके नाम से फर्जी हाजिरी बनाकर पैसा निकाल लिया गया।
मीडिया टीम जब ग्राम पहुंची तो ग्रामीणों ने बताया कि कई हितग्राहियों का आवास जमीनी स्तर पर बना ही नहीं है। किसी अन्य के बने हुए आवास को दिखाकर राशि का आहरण कर लिया गया है।
इस संबंध में पूर्व आवास मित्र से संपर्क का प्रयास किया गया, लेकिन कोई जवाब नहीं मिला। वहीं रोजगार सहायक ने मजदूरी भुगतान की जानकारी देने से इंकार कर दिया। उनका कहना है कि मनरेगा को बंद कर उसे “बी बी रामजी” में कन्वर्ट कर दिया गया है, इसलिए भुगतान की लिस्ट नहीं दिखाई जा सकती।
ग्रामीणों ने कलेक्टर से मांग की है कि आवास और मनरेगा दोनों की संयुक्त जांच कराई जाए और दोषियों पर 420 व भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत कार्रवाई की जाए। ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि पूर्व आवास मित्र द्वारा भी लाखों रुपए कमीशन लेकर फर्जी जिओटैग किया गया है।

