अंबिकापुर / सरगुजा (करतला टाइम्स)। एकलव्य आदर्श आवासीय विद्यालय सरकार की सबसे महत्वाकांक्षी योजना है, जहां आदिवासी बच्चों को कलेक्टर-डॉक्टर बनाने का सपना दिखाया जाता है। लेकिन सरगुजा जिले के शिवपुर के एकलव्य स्कूल में इस सपने का गला घोंटा जा रहा था।
हद तो तब हो गई जब इंसाफ के लिए स्कूल की छात्राओं को खुद सड़क पर उतरना पड़ा। सोमवार को गुस्साई दर्जनों छात्राएं स्कूल से 16 किलोमीटर पैदल चलकर सीधे अंबिकापुर कलेक्ट्रेट पहुंच गईं* और कलेक्टर के सामने फूट-फूट कर रो पड़ीं।
क्या-क्या नरक झेल रही थीं बेटियां?
कलेक्टर के सामने छात्राओं ने जो बताया वो रूह कंपा देने वाला है –
*1. 3 महीने से अंधेरे में जिंदगी:* स्कूल और हॉस्टल की बिजली पिछले 3 महीने से बंद है। बेटियां मोमबत्ती और मोबाइल की रोशनी में पढ़ने और सोने को मजबूर हैं। गर्मी में पंखा तक नहीं चल रहा।
*2. पढ़ाई के नाम पर खानापूर्ति:* 11वीं-12वीं की छात्राओं ने बताया कि फिजिक्स और केमेस्ट्री जैसे मुख्य विषयों के शिक्षक आते ही नहीं। प्रैक्टिकल तो दूर, थ्योरी तक ठीक से नहीं हो रही, भविष्य अंधकार में है।
*3. मेस में जानवरों जैसा खाना:* हॉस्टल मेस की सफाई व्यवस्था बद से बदतर है। खाने में कीड़े, गंदगी और बदबू की शिकायत कई बार प्रिंसिपल से की, पर कोई सुनवाई नहीं।
प्रशासन में हड़कंप, आधी रात को एक्शन
छात्राओं के कलेक्ट्रेट पहुंचते ही प्रशासन के होश उड़ गए। कलेक्टर ने तुरंत आदिम जाति कल्याण विभाग के सहायक आयुक्त को तलब किया।
प्रारंभिक जांच में शिकायतें सही पाए जाने पर *बड़ी कार्रवाई की गई है -*
– *प्रिंसिपल ओम प्रकाश को तत्काल प्रभाव से प्रभार से हटाकर मुख्यालय अटैच कर दिया गया है।*
– *हॉस्टल अधीक्षिका (वार्डन) को कारण बताओ नोटिस जारी कर 24 घंटे में जवाब मांगा गया है।*
– बिजली विभाग को 24 घंटे के अंदर कनेक्शन बहाल करने के निर्देश दिए गए हैं।
सबसे बड़ा सवाल यही है – क्या 3 महीने तक बिजली बंद रही और किसी अधिकारी को भनक तक नहीं लगी? DEO, आदिवासी विकास विभाग के अधिकारी, आखिर फील्ड में क्या कर रहे थे?
करोड़ों रुपये के बजट से चलने वाले एकलव्य स्कूल में अगर ये हाल है, तो दूर-दराज के सामान्य आश्रम-छात्रावासों का क्या हाल होगा, इसका अंदाजा लगाना मुश्किल नहीं।
अगर ये बेटियां 16 KM पैदल चलकर कलेक्टर के पास न जातीं, तो ये मामला आज भी फाइलों में दबा रहता।








