कोरबा। सलोरा गांव की कमला कुमारी के लिए कॉलेज पहुंचना रोज की जंग था। बचपन से दोनों पैर काम नहीं करते, पुरानी ट्राइसाइकिल जाम हो चुकी थी। 2 किमी का रास्ता घसीट-घसीटकर तय करतीं, पसीने से तरबतर होकर क्लास में बैठतीं। M.A. की पढ़ाई जारी रखना उनके लिए हौसले का इम्तिहान था।
फिर आया सुशासन तिहार।
धनरास में लगे जनसमस्या शिविर में कमला ने हिम्मत करके मंत्री लखनलाल देवांगन के सामने रख दी अपनी तकलीफ। मंत्री ने तुरंत अफसरों को बुलाया – “इस बच्ची की मदद होनी चाहिए, अभी।”

परिणाम: आज कलेक्टर कुणाल दुदावत ने कमला के हाथों में नई मोटराइज्ड ट्राइसाइकिल की चाबी थमा दी।
चाबी देते हुए कलेक्टर ने सिर्फ इतना कहा: *“बिटिया, अच्छे से पढ़ना और आगे बढ़ना।”
कमला की आंखें भर आईं। मां संतकुंवर, जो मजदूरी करके घर चलाती हैं, बोलीं – “हमारी औकात नहीं थी खरीदने की। सरकार ने बेटी के सपनों को पहिए दे दिए।”
अब कमला को न कॉलेज की चिंता, न रास्ते की। मोटराइज्ड ट्राइसाइकिल ने सिर्फ दूरी नहीं, उनका आत्मविश्वास भी बढ़ा दिया है।


