कोरबा// तुमान में विधानसभा स्तरीय मनरेगा बचाव संग्राम कार्यक्रम आयोजित किया गया, जिसमें सांसद ज्योत्सना महंत ने भाग लिया। उन्होंने कहा कि मनरेगा गरीबों और श्रमिकों के लिए एक महत्वपूर्ण योजना है, लेकिन मोदी सरकार इसे खत्म करने पर आमादा है।
*मनरेगा में प्रस्तावित बदलावों के खतरे:*
1. *काम करने का अधिकार छीना जा रहा है*: मनरेगा के तहत देश भर के प्रत्येक ग्रामीण परिवार को काम की कानूनी गारंटी प्राप्त थी, लेकिन मोदी सरकार के इन बदलावों के बाद काम अब यह अधिकार नहीं रहेगा, बल्कि सरकार की मर्जी से बाँटी जाने वाली एक “रेवड़ी” बन जाएगा।
2. *मज़दूरी पाने का अधिकार छीना जा रहा है*: मनरेगा के तहत काम तय न्यूनतम मज़दूरी पर दिया जाता था, जिसमें हर साल बढ़ोतरी की जाती थी। लेकिन मोदी सरकार के इन बदलावों के तहत मज़दूरी मनमाने ढंग से तय की जाएगी, न तो न्यूनतम मज़दूरी की कोई गारंटी होगी और न ही हर साल बढ़ोतरी का कोई गारंटी।
3. *ग्राम पंचायत की शक्तियां ठेकेदारों को सौंपी जा रही हैं*: मनरेगा के तहत ग्राम पंचायतों को अपने गाँव के विकास के लिए विभिन्न कार्यों में मज़दूरों को नियोजित करने का अधिकार था, लेकिन मोदी सरकार के इन बदलावों के बाद सभी फैसले दिल्ली से रिमोट कंट्रोल के ज़रिये लिए जाएंगे।
4. *राज्य सरकार को कमजोर किया जा रहा है और उस पर आर्थिक बोझ डाला जा रहा है*: मनरेगा के तहत आपकी मज़दूरी का 100% भुगतान केंद्र सरकार करती थी, इसलिए राज्य सरकारें बिना किसी कठिनाई के काम उपलब्ध करा पाती थीं। लेकिन मोदी सरकार के इन बदलावों के तहत राज्य सरकारों को आपकी मज़दूरी का 40% हिस्सा स्वयं वहन करना होगा।
मनरेगा बचाव संग्राम की चार माँगें:
1. काम की गारंटी, मज़दूरी की गारंटी, जवाबदेही की गारंटी
2. मनरेगा में किए गए बदलावों की तत्काल वापसी
3. काम के संवैधानिक अधिकार की पूर्ण बहाली
4. न्यूनतम वेतन 400 रुपये

