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पोड़ी-उपरोड़ा में महिलाओं ने तैयार किया हर्बल गुलाल,
-पालक-हल्दी से बने रंगों की बाजार में बढ़ी मांग
कोरबा। रंगों का त्योहार होली नजदीक है और बाजारों में तैयारियां जोरों पर हैं। इसी बीच कोरबा जिले के पोड़ी-उपरोड़ा क्षेत्र में स्व-सहायता समूहों से जुड़ी महिलाओं ने प्राकृतिक और सुरक्षित हर्बल गुलाल तैयार कर एक अनूठी पहल की है। बुका फार्मर प्रोड्यूसर ऑर्गेनाइजेशन से जुड़ी लगभग 30 महिलाएं पालक, चुकंदर और हल्दी जैसी खाद्य सामग्रियों का उपयोग कर अलग-अलग रंगों के हर्बल गुलाल बना रही हैं, जो त्वचा विशेषकर बच्चों के लिए सुरक्षित माने जा रहे हैं।
महिलाएं अरारोट पाउडर से गुलाल का बेस तैयार कर उसमें पालक, चुकंदर और हल्दी का घोल मिलाती हैं। खुशबू के लिए केवड़ा, सफेद गुलाब, केसर के साथ-साथ बच्चों की पसंद को ध्यान में रखते हुए स्ट्रॉबेरी, पाइनएप्पल और मैंगो जैसे फूड-ग्रेड फ्लेवर भी मिलाए जा रहे हैं। निर्माण प्रक्रिया के दौरान स्वच्छता का विशेष ध्यान रखा जाता है। महिलाएं ग्लव्स और हेयर नेट का उपयोग कर पूरी हाइजीन के साथ उत्पादन कर रही हैं।
बुका फार्मर प्रोड्यूसर ऑर्गेनाइजेशन की अध्यक्ष पूजा सिंह ने बताया कि इस वर्ष 20 टन हर्बल गुलाल तैयार करने का लक्ष्य रखा गया है। अब तक 6 क्विंटल का ऑर्डर प्राप्त हो चुका है। उन्होंने उम्मीद जताई कि इस पहल से समूह की महिलाओं को 25 से 30 प्रतिशत तक लाभ होगा, जिससे वे आर्थिक रूप से और अधिक सशक्त बन सकेंगी।
यह पहल बिहान योजना के तहत राष्ट्रीय आजीविका मिशन द्वारा संचालित गतिविधियों का हिस्सा है। जिला मिशन प्रबंधक अनुराग जैन के अनुसार, पहली बार बच्चों की पसंद और त्वचा की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए बड़े पैमाने पर प्राकृतिक गुलाल तैयार किया जा रहा है। इसकी कीमत भी बाजार में उपलब्ध अन्य ब्रांडेड उत्पादों से कम रखी गई है, जिससे मांग में लगातार वृद्धि हो रही है।
जिला कलेक्टर कुणाल दुदावत ने इस प्रयास को महिला सशक्तिकरण की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बताते हुए जिलेवासियों से अपील की है कि वे इको-फ्रेंडली रंगों का उपयोग करें और स्थानीय स्व-सहायता समूहों द्वारा तैयार उत्पादों को प्रोत्साहन दें।
प्राकृतिक रंगों की यह पहल न केवल होली को सुरक्षित और आनंददायक बनाएगी, बल्कि महिलाओं की आर्थिक आत्मनिर्भरता को भी मजबूती प्रदान करेगी।

